दाने का बेहतर भराव
अधिक भराव से बेहतर गुणवत्ता और एकसमान आकार
टॉपग्रेन® अनाज के दानों में भराव लाने की तकनीक है और यह भारत की पहली विशेष तकनीक है, जिसे विशेष रूप से धान और गेहूं के लिए डिज़ाइन किया गया है।
Better Grain Filling
Uniform Development
अधिक भराव से बेहतर गुणवत्ता और एकसमान आकार
ज़्यादा मुनाफ़े के लिए भारी दाने
अधिक मुनाफ़े के लिए अधिक पैदावार
टॉपग्रेन® अनाज के दानों में भराव लाने की तकनीक है और यह भारत की पहली विशेष तकनीक है, जिसे विशेष रूप से धान और गेहूं के लिए डिज़ाइन किया गया है।
यह फसल में प्राकृतिक रूप से दाना भरने की प्रक्रिया को मजबूत बनाने के लिए पौधे में काम करता है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि पौधे के विकास की पूरी क्षमता दानों में प्रभावी तरीके से स्थानांतरित हो। टॉपग्रेन® दानों के बनने के दौरान शुगर के अच्छी तरह इनमें जाने और स्टार्च निर्माण में सहायता देकर फसल वृद्धि को उपज में बदलने में मदद करता है ।
पत्तियों से विकसित हो रहे दानों तक शुगर पहुँचाने में सहायता करता है।
तने में जमा ऊर्जा को आगे बढ़ाता है।
दाने के अंदर स्टार्च निर्माण में सहायता करता है।
बालियों में दानों का एकसमान भराव सुनिश्चित करता है।
परिणाम : बालियाँ अधिक भरी हुई, भारी और एक समान होती हैं, जिससे उपज और अनाज की गुणवत्ता में सुधार होता है।
कई बार पूरी भरी दिखाई देने वाली बालियों से भी पूरी पैदावार नहीं मिल पाती है?
पूरे भारत में धान और गेहूं की फसलें फूल आने तक अधिकांशत: मजबूत दिखाई देती हैं। फसलों की वृद्धि अच्छी तरह होती है, बालियां अच्छी तरह से बनते हैं और लगता है कि सब कुछ योजना के अनुसार चल रहा है।
लेकिन किसानों के सामने फसल की कटाई के समय अधिकांशत: निम्नलिखित समस्याएं आती हैं :
उपज में हानि कहाँ होती है?
फूल आने के बाद अनाज के दाने भरने की अवस्था के दौरान उपज में कमी आती है, जो उपज बनने का अंतिम और सबसे अहम चरण होता है। अच्छे संकर बीज लेने, सही पोषण और फसल के पूरे रखरखाव के बाद भी इसमें अनाज के दाने भरने के चरण में अधिकांशतः इसका फायदा नहीं मिलता है।
दाने भरने में समस्या के कारण इस प्रकार हैं।
परिणाम: फसल की पूरी ताकत कटाई योग्य उपज में परिवर्तित नहीं हो पाती है।
अनाज के दानों में भराव : इसी समय उपज का अंतिम फैसला होता है
अनाज भरने की प्रक्रिया के चरण पर पत्तियों में प्रकाश संश्लेषण (पौधों में भोजन बनाने की विधि) द्वारा तैयार होने वाला भोजन, तने में पहले सेजमा ऊर्जा के साथ विकसित हो रहे अनाजों में धीरे धीरे जाता है, जिससे इनमें धीरे-धीरे परिपक्व होने तक दानों में भराव होता है।
इस चरण में निम्नलिखित बातों को तय किया जाता है:
दानों का वजन
दाने का आकार
दानों की एकरुपता
बाजार में बिक्री योग्य उपज
खेतों में किन परिस्थितियों में क्या गलती हो सकती है?
भारत में होने वाली खेती की परिस्थितियों में, गर्मी, नमी का असंतुलन, पोषक तत्वों की कमी और हार्मोनल असंतुलन जैसी बातों से होने वाले तनाव से कई बार भोजन को दानों तक आने में बाधाएं आती हैं।
इसके परिणाम स्वरूप फसल के बाहर से मजबूत दिखने पर भी दानों को पूरी तरह भरने के लिए पूरी ताकत नहीं मिल पाती है। यही कारण है कि धान और गेहूं में दानों का भराव उपज को निर्धारित करने वाला सबसे महत्वपूर्ण चरण है।
टॉपग्रेन®अनाज के दानों के भराव में सुधार आने से कटाई के समय स्पष्ट और पर्याप्त लाभ प्रदान करता है।
लेबल निर्देशों और स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार उपयोग करें
बाली निकलने की अवस्था: वह समय होता है जब 50% प्राथमिक बालियां गोभ से बाहर निकल आती हैं।
दाने भरने की शुरुआती अवस्था: जब दाने पानीयुक्त हों या शुरुआती दूधिया अवस्था में हों, तब छिड़काव करें : फूल आने के लगभग 7-10 दिन बाद।
उपयोग की विधि :छिड़काव का घोल तैयार करने के लिए स्प्रे टैंक में कम मात्रा में पानी लेकर इसमें टॉपग्रेन® की आवश्यक मात्रा डालें। पानी की कुल मात्रा को आवश्यक स्तर तक लाने के लिए घोल को हिलाते रहें।
टॉपग्रेन® को पूरी तरह से घोलने के लिए अच्छी तरह से हिलाते हुए मिलाएं और फिर 0.5 मि.ली./लीटर पानी की दर से नॉन-आयनिक सर्फेक्टेंट मिलाएं।
जानिए किसानों के अनुभव और देखें कि टॉपग्रेन® ने उनकी फसल में दाना भराव, गुणवत्ता और उपज क्षमता को कैसे बेहतर बनाया।
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